वालमार्ट फ्लिकार्ट के खिलाफ कैट करेगा देशव्यापी आंदोलन


कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के हाल ही में दिल्ली में संपन्न हुए तीन दिवसीय राष्ट्रीय व्यापारी महाधिवेशन में देश के 1500 से अधिक प्रमुख व्यापारी नेताओं ने एक स्वर से वालमार्ट-फ्लिपकार्ट डील को रिजेक्ट करते हुए कहा की इस डील का देश भर में सड़कों एवं न्यायालयों में जोरदार विरोध किये जाएगा ! यह डील देश के रिटेल व्यापार के लिए बेहद प्रतिघाती है और वालमार्ट द्वारा देश के रिटेल व्यापार पर कब्ज़ा जमाने का एक जरिया है !

अधिवेशन में वाणिज्य मंत्री श्री सुरेश प्रभु के व्यापारियों को बताया की इस डील और ई कॉमर्स कंपनियों के बारे में उनके मंत्रालय को जो भी शिकायतें प्राप्त हुई थी वो आगे कार्यवाही के लिए उन्होंने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया और ई डी को भेज डी हैं, इस दृष्टि से कैट ने निर्णय लिया की आगामी दिनों में रिज़र्व बैंक और ई डी के देशव्यापी कार्यालयों पर प्रदर्शन कर मांग की जाएगी की इस डील एवं ई कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ जांच होकर तुरंत कदम उठाये जाएँ ! उधर कैट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग से कहा हे की इस मामले में कैट द्वारा दाखिल एतराजों को सुनने का मौका दिए बिना इस डील को किसी भी कीमत पर अनुमति नहीं डी जानी चाहिए !

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की कल दिल्ली में ई कॉमर्स पर गठित थिंक टैंक की बैठक में वो इस मुद्दे को जोर शोर से उठाएंगे !

 कैट ने सरकार से मांग की है की इस डील को रद्द किया जाए और ई कॉमर्स के लिए एक नीति तुरंत बनाई जाए वहीँ दुसरी ओर ई कॉमर्स के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी भी बनाई जाए जो देश में ई कॉमर्स व्यापार की देख रेख करे ! 

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने इस डील को वालमार्ट द्वारा भारत के  रिटेल व्यापार पर कब्ज़ा जमाने की कोशिश बताते हुए कहा वालमार्ट कथित रूप से विश्व का सबसे बड़ा रिटेलर है और फ्लिपकार्ट प्लेटफार्म पर लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, भारी डिसकॉऊंट और नुकसान की भरपाई के रास्ते से वालमार्ट अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करेगा जिससे भारतीय व्यापारियों को नुकसान होगा और वो इनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे !

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की फ्लिपकार्ट विसंगतियों से भरा ई कॉमर्स प्लेटफार्म है जहाँ लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, कुछ व्यक्तियों अथवा कंपनियों के साथ एकल समझौते एवं कुश ख़ास रिटेलरों को सैदव तरजीह देना शामिल हैं ! वालमार्ट 77 प्रतिशत शेयर लेकर फ्लिपकार्ट का वास्तविक मालिक है और इस वजह से स्वाभाविक है की जो उत्पाद वालमार्ट द्वारा दुनिया भर में बेचे जाते हैं वो उनको तरजीह देगा जिससे ऑनलाइन एवं ऑफलाइन व्यापारियों को वो माल नहीं मिलेगा और वो प्रतिस्पर्धा में कहीं नहीं टिकेंगे ! यह बेहद अनुचित प्रतिस्पर्धा के वातावरण का निर्माण करेगा !

फ्लिपकार्ट द्वारा अब तक बनाये गए नेटवर्क और ई कॉमर्स प्लेटफार्म का भरपूर इस्तेमाल कर वालमार्ट पूरी शक्ति से अनुचित एवं गैर उचित रास्तों के द्वारा भारत के बाज़ार के दुनिया भर के उत्पादों से भर देगा और रिटेलरों के पास केवल दो विकल्प होंगे या तो बाज़ार से बाहर हो जाएँ या फिर वालमार्ट की शर्तों को स्वीकार करते हुए काम करें ! इससे एक तरह से वालमार्ट का कब्ज़ा भारतीय बाज़ार पर होने में देर नहीं लगेगी तथा घरेलु मैनुफैचरिंग को गहरा धक्का पहुंचेगा !

दोनों व्यापारी नेताओं ने आशंका व्यक्त करते हुए कहा की वालमार्ट के माध्यम से एक बार फिर ईस्ट इंडिया कंपनी की कहानी दोहराई जा सकती है क्योंकि ई कॉमर्स के रास्ते से वालमार्ट दुनिया  के किसी भी हिस्से से सस्ते से सस्ता माल लाकर हिंदुस्तान को डंप यार्ड बनाएगा और प्रतिस्पर्धा को समाप्त करेगा ! अफ़सोस की बात ये है की ई कॉमर्स या रिटेल ट्रेड के लिए कोई पालिसी नहीं है जिससे वालमार्ट की इस प्रवृति पर रोक लगायी जा सके !

कैट  ने मांग की है  की वालमार्ट -फ्लिपकार्ट सौदे की हर दृष्टि से गहरी जांच होनी चाहिए ! आशंका है की वालमार्ट की यह डील एफडीआई पालिसी और कानूनी रास्तों को दरकिनार करते हुए ई कॉमर्स के माध्यम से देश के रिटेल बाजार में तब्दील होगी !ई कॉमर्स और रिटेल ट्रेड के लिए कोई पालिसी न होने के कारण से वालमार्ट को रिटेल बाज़ार में प्रवेश करने में सुविधा होगी ! यह कोई दो कंपनियों के बीच का सौदा नहीं है बल्कि इसका बड़ा प्रभाव देश के रिटेल व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा !

श्री भरतिया एवं श्री खंडेलवाल ने कहा की  जो डाटा वालमार्ट को मिलेगा उसका उपयोग टारगेट कंस्यूमर को विज्ञापन के जरिये वालमार्ट फ्लिपकार्ट से जोड़ा जाएगा और उन्हें ख़ास रिटेलरों द्वारा माल सप्लाई किया जायेगा ! वालमार्ट अपने खुद के ब्रांड एवं लेबल भी बनाएगा और वो माल केवल वालमार्ट के पास ही मिलेगा ! पूरी सप्लाई चैन पर वालमार्ट का कब्ज़ा होगा ! कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी की जायेगी और एफडीआई पालिसी का उल्लंघन होगा और ई कॉमर्स के जरिये वालमार्ट भारत के रिटेल बाज़ार में सीधे प्रवेश करेगा ! ई कॉमर्स या रिटेल व्यापार के लिए कोई पालिसी न होने से वालमार्ट के लिए ऐसा करना बहुत आसान होगा !