जीएसटी से बचना लगभग नामुमकिन


जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ऐसा तकनीकी तंत्र विकसित कर रहा है जो सरकार को टैक्स चोरों और रिटर्न फाइल नहीं करनेवालों पर कार्रवाई करने में मदद करेगा। अभी तो रिटर्न्सका मिलान नहीं किया जा रहा है, लेकिन जीएसटीएन जीएसटीआर-1 का जीएसटीआर 3B से मिलान करने में केंद्र और राज्य के टैक्स ऑफिसरों की मदद करनेवाले एक टूल की पड़ताल कर रहा है। इसके अलावा इनकम टैक्स की तरह ही जीएसटी ऑफिसरों और करदाताओं के लिए भी एक डैशबोर्ड तैयार करने की योजना है जहां जीएसटी का भुगतान करनेवाला हर करदाता की जानकारी उसके लिए उपलब्ध टैक्स क्रेडिट और अन्य सूचनाओं के साथ उपलब्ध होगी। 

इससे इतर जिन लोगों ने रिटर्न भरना छोड़ दिया है, उन्हें अलर्ट भेजे जाने की भी योजना है ताकि उनसे नियमों का पालन करवाया जा सके। इनकम टैक्स के मामले में भी सरकार उन लोगों को रिटर्न फाइल करने का दबाव बना रही है जो ऐसा करना छोड़ रहे हैं। सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि सरकार का मकसद टैक्स का दायरा बढ़ाकर पर्याप्त टैक्स जुटाना है। कुछ राज्यों के वित्त मंत्रियों ने कानून का पालन नहीं होने पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि इससे पहले मापदंडों के आधार पर लगाए गए अनुमान से कम राजस्व हासिल हो रहा है। 

क्यों कुछ कारोबारी रिटर्न फाइल करने में आदतन लेट-लतीफ होते हैं, इसका पता लगाने की भी कोशिशें शुरू हो चुकी हैं। एक अधिकारी ने बताया, 'हालांकि ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन कुछ मामले ऐसे भी आए हैं जिनमें लोगों ने समयसीमा खत्म होने के बाद सभी 11 रिटर्न्स (पिछले साल जुलाई में जीएसटी लागू होने के बाद से) फाइल कर दिए।' 

जीएसटीएन अगले कुछ दिनों में रिटर्न फाइल करने में आदतन देरी करनेवालों को नोटिस भेजेगा ताकि उनकी लेट-लतीफी का पता लग सके और इसका भी आकलन हो सके कि क्या सिस्टम में सुधार की जरूरत है। 

आईटी के मसले पर गठित समूह की अगुवाई करनेवाले बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि जीएसटीएन यह विश्लेषण कर रहा है कि क्या जो लोग देरी से रिटर्न फाइल कर रहे हैं या जो जीरो रिटर्न फाइल कर रहे हैं, उन पर टैक्स देनदारी भी बनती है। सूत्र ने कहा, 'हालांकि, ऐसे लोगों की तादाद अभी ज्यादा नहीं है, लेकिन यह संख्या बढ़ती जा रही है।'