बचपन में छोटे से घर की फर्श पर सोते थे गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई


बहुत कम लोग जानते होंगे कि सुंदर पिचाई की परवरिश एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुई थी और उन्हें तंगहाली में अपना जीवन गुजारना पड़ा| न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन से जुड़े कई राज खोले|


दुनिया की सबसे बड़ी इंटर नेट कंपनियों में से एक गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने इस मुकाम पर पहुंचकर अपनी पहचान को स्थापित ही नही किया साथ ही में भारत का मान भी बढ़ाया| बहुत कम लोग जानते होंगे कि सुंदर पिचाई की परवरिश एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुई थी और उन्हें तंगहाली में अपना जीवन गुजारना पड़ा| न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन से जुड़े कई राज खोले| उन्होंने बताया कि कैसे उनका बचपन भी एक आम मध्यमवर्गीय भारतीय की तरह गुजरा था|
चेन्नई में पले-बढ़े सुंदर ने कहा, ’मेरी जिंदगी काफी साधारण थी| हम एक छोटे से घर में रहते थे जिसमें कुछ किरायेदार भी रहते थे| हम फर्श पर सोते थे| जब मैं बड़ा हो रहा था तो एक समय काफी सूखा पड़ा था| इससे हम सभी चिंतित हो गए थे| उस दौर का इतना गहरा असर मुझ पर पड़ा कि आज भी मैं हमेशा सोते वक्त एक पानी की बोतल अपने बेड के पास रखता हूं| मुझे पानी के बगैर नींद नहीं आती|’ सुंदर पिचाई ने बताया कि उस वक्त उनके पड़ोसियों के यहां फ्रिज आ गई थी, लेकिन उनके यहां फ्रिज नहीं हुआ करती थी|
वे कहते हैं, ’बाकी लोगों के घर में फ्रिज रहा करती थी और ये उस वक्त काफी बड़ी बात हुआ करती थी| जब हमारे घर फ्रिज आई तो हम लोग खुशी से फूले नहीं समाए थे|’ सुंदर को बचपन से ही पढ़ने का शौक रहा है| वे कहते हैं, ’जो कुछ भी मेरे हाथ लगता था मैं वो सब पढ़ डालता था|’ उनका जीवन आम भारतीय बच्चों की तरह गुजरा| उन्होंने गली की सड़कों पर क्रिकेट भी खेला| उनकी जिंदगी साधारण जरूर थी, लेकिन वे कहते हैं कि इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई|
पढ़ाई में अव्वल होने के कारण उनका चयन आईआईटी खड़गपुर में हो गया| यहां से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने मास्टर्स करने के लिए स्टैनफोर्ड का रुख किया जहां से उन्होंने मटेरियल साइंस ऐंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की| उन्होंने बाद में पेन्सिल्वेनिया के वॉर्टन स्कूल से एमबीए की पढ़ाई भी की| न्यूयॉर्क टाइम्स ने जब उनसे स्टैनफोर्ड के दिनों के अनुभवों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ’ये पहला मौका था जब मुझे प्लेन में बैठने का मौका मिला था| मैं हमेशा से सिलिकॉन वैली का हिस्सा बनना चाहता था| मुझे याद है जब मैंने कैलिफॉर्निया में लैंडिंग की थी और वहां कई हफ्ते गुजारे थे|’
अपने आईआईटी के दिनों को याद करते हुए सुंदर बताते हैं, ’हम लोगों को बड़ी मुश्किल से कंप्यूटर लैब में जाने का मौका मिलता था| मुझे सिर्फ चार या पांच बार लैब में जाने का मौका मिला| ये हमारे लिए बड़ी बात हुआ करती थी| उस वक्त मुझे नहीं पता था कि यह इंटरनेट इतनी जल्दी पूरी दुनिया बदल देगा|’ सुंदर से इंटरनेट की दुनिया से भी सवाल किए गए|
उनसे पूछा गया कि गूगल जैसी टेक कंपनियां पोर्नोग्राफी और हिंसात्मक तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तो हटा देती हैं, लेकिन गलत जानकारी, अफवाह और बच्चों के मन पर बुरा प्रभाव डालने वाली विषय वस्तु को क्यों नहीं हटा पातीं? इस सवाल पर सुंदर ने कहा, ’हमारा समाज काफी विविध है| कई सारी चीजें ऐसी
हैं जो सर्वमान्य हैं, लेकिन कई सारी चीजें ऐसी भी हैं जिन पर हमारा समाज एकमत नहीं है| ऐसे मुद्दों पर कोई लकीर खींचना काफी मुश्किल काम है| अमेरिका और ब्रिटेन में एक ही चीज को लेकर दो मत होते हैं| कुछ चीजें जो वहां के लोगों के लिए ठीक होती हैं वह दूसरी जगह के लोगों के लिए सही नहीं लग सकती|’
सुंदर ने क्लाइमेट चेंज का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे समाज में कई सारी ऐसी समस्याएं हैं जिन पर हमें एकमत होना पड़ेगा| उन्होंने कहा कि हम इंसानों की मदद के रिव्यू करने का काम देख रहे हैं, लेकिन इंसानों से भी गलतियां हो सकती हैं| सुंदर पिचाई ने २००४ में गूगल का हाथ थामा था| वे गूगल क्रोम को विकसित करने वाली टीम का हिस्सा थे| दस साल बाद उन्हें प्रॉडक्ट, इंजीनियरिंग और रिसर्च विंग का इनचार्ज बना दिया गया| उन्होंने एंड्रॉयड को डेवलप करने पर भी काम किया २०१५ में उन्हें कंपनी ने सीईओ बना दिया|
न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार डेलिड गेल्स ने सुंदर से गूगल के कर्मचारियों द्वारा लगाए जा रहे यौन उत्पीड़न से जुडे़ आरोपों पर भी सवाल पूछा| इस पर सुंदर ने कहा, ’लोग सामने निकलकर आ रहे हैं क्योंकि वे हमें बेहतर बनाना चाहते हैं| वे चाहते हैं कि हम अच्छे बनें| हमें भी ये समझ आया कि काफी कुछ गलत हो रहा है|’ गूगल ने इन आरोपों की वजह से ही कंपनी के यौन उत्पीड़न रूल्स में परिवर्तन किया है और इन सभी मामलों में पारदर्शिता बरतने का वादा किया है|